कोरोना की वजह से कम हुआ नेत्रदान, मरीजों का इंतजार बढ़ा
Editor : Mini
 07 Sep 2021 |  347

नई दिल्ली,
कोविड ने सरकार के नेत्रदान अभियान को बुरी तरह प्रभावित किया है। लंबे समय से कॉर्निया का इंतजार कर रहे लोगों के इंतजार की अवधि बढ़ गई। जिससे अंधता निवारण कार्यक्रम पर ब्रेक लग गया। नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए देश भर में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं लेकिन कोरोना महामारी की वजह से नेत्रदान नहीं हो पाया और मरीजों की प्रतीक्षा सूची बढ़ गई। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में ऐसे मरीजों की सूची काफी लंबी है जिनमें से कुछ ही जिंदगियों में वापस से रोशनी लाने में डॉक्टरों को कामयाबी मिल पाई।
मंगलवार को एम्स के 36वें नेत्रदान पखवाड़े पर एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान संस्थान (आरपी सेंटर) के प्रमुख डॉ. जेएस टिटियाल ने बताया कि कोरोना महामारी की वजह से नेत्रदान और कॉर्निया प्रत्यारोपण पर काफी गहरा असर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच 394 कॉर्निया टिश्यू दान में मिले जिनमें से 311 को प्रत्यारोपित किया गया। दान में मिलीं आंखों का प्रत्यारोपण में प्रयोग दर 78.9 फीसदी रही। जबकि इससे पहले साल 2019 में 18359 आंखें दान में मिली थीं और इनमें से 12998 लोगों के जीवन में फिर से रोशनी लाई गई। दो साल पहले एम्स में कॉर्निया प्रत्यारोपण की वेटिंग सूची काफी लंबी थी लेकिन महामारी के चलते काफी कुछ असर देखने को मिला है। इसलिए एम्स ने फिर से नई सूची बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि पुराने मरीज अगर अभी भी वेटिंग में है तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
एम्स के मुताबिक कोरोना महामारी से पहले अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच 79.90 फीसदी नेत्रदान में कमी आई है। वहीं 78.20 फीसदी कमी इनके प्रयोग दर में मिली है। यह गंभीर प्रभाव है और अब इससे बाहर आने की कोशिश की जा रही है लेकिन एम्स के पास फिलहाल न सिर्फ पुराने मरीज बल्कि नए मरीज भी काफी संख्या में सामने आ रहे हैं। स्थिति यह है कि दूसरी लहर के बाद से अब तक तीन से चार गुना अधिक मरीज पंजीयन करा चुके हैं।
सालाना एक लाख से अधिक ऑपरेशन का लक्ष्य
डॉक्टरों के अनुसार सालाना एक लाख से अधिक मरीजों के जीवन में वापस से रोशनी लाने के लिए वर्षों से काम किया जा रहा था लेकिन महामारी के बाद अचानक से सभी प्रयास विफल हो गए। बीते 56 साल में राष्ट्रीय नेत्र बैंक (एनईबी) की वजह से 32 हजार से भी अधिक कॉर्निया दान में मिल चुके हैं जिनमें से 22500 से भी ज्यादा कॉर्निया प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं। साल 2019 में राष्ट्रीय अंधापन और दृश्य हानि सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 50 साल से कम आयु में कॉर्निया से जुड़ी बीमारियां अंधापन का मुख्य कारण रही हैं। इनकी वजह से 37.5 फीसदी मामले मिल चुके हैं। जबकि 50 वर्ष से अधिक आयु में ऐसे मामले 8.20 फीसदी ही दर्ज किए जा चुके हैं। भारत में करीब 68 लाख से अधिक लोग अंधापन के शिकार हो सकते हैं।

फंगस की वजह से हुआ काफी नुकसान
डॉक्टरों ने बताया कि महामारी के दौरान फंगस के मामले पिछले साल और इस बार देखने को मिले हैं। साल 2020 में 16 मरीजों की आंखें तक निकालनी पड़ गई थीं और उस दौरान स्टेरॉयड की भूमिका नहीं थी लेकिन दूसरी लहर के बाद काफी मरीज भर्ती हुए हैं जिनमें स्टेरॉयड के अलावा अनियंत्रित मधुमेह भी मुख्य कारण रही। करीब छह से सात मरीजों की सर्जरी करके आंखें तक निकालनी पड़ गईं। फंगस की वजह से अंधापन हो सकता है लेकिन कोरोना महामारी की वजह से अंधापन होने की पुष्टि नहीं हो सकी है।


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