एचआईवी मरीजों के वायरल लोड की जांच का करार हुआ खत्म
Editor : Mini
 01 Dec 2021 |  324

नई दिल्ली,
कोविड काल में एचआईवी (HIV)संक्रमित मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है। भारत सरकार द्वारा एचआईवी संक्रमित मरीजों को एआरटी (ART )इलाज और एचआईवी जांच की सुविधा दी जाती है, बावजूद इसके वर्ष 2019 में एचआईवी संक्रमित साठ हजार मरीजों की मौत हो गई, और यह संभावना है कि कोविड महामारी के कारण प्रभावित स्वास्थ्य सेवा की वजह से अगले कुछ सालों में यह आंकड़ा बढ़ सकता है। इसी बीच महामारी की वजह से कुछ राज्यों में एक निजी लैबारेटरी के साथ हुआ वायरल लोड (Viral Load) जांच का करार भी खत्म हो गया है। विश्व एड्स दिवस (World Aids day) (एक दिसंबर) फाइट एड्स कोलिशन(पीएलएचआईवी) ने नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी को इस बावत पत्र लिखा है। जिसमें जांच और इलाज संबंधी कई मुद्दों को शामिल किया गया है।
यूएनएड्स ने इस विषय पर चिंता व्यक्त की है। सबसे अहम यह है कि एचआईवी मरीजों की मृत्यु टीबी, फेफड़ो का निमोसाइटिस निमोनिया, क्रिप्टोकॉकल मेनिनजाइटिस, फंगल संक्रमण आदि की वजह से हो रही है। इसकी प्रमुख वजह है कि एचआईवी संक्रमित एक तिहाई मरीजों को सीटीफोर काउंट 200 (CD4COUNT) से भी कम है। फाइट एड्स कोलिशन जो कि पीयुपिल्स लिविंग विथ एचआईवी का एक समूह है ने विश्व एक दिवस एक दिसंबर को एड्स को खत्म करने के लिए नाको को एक पत्र लिखा है। संगठन के अनुसार कोविड की वजह से बीते दो साल से एचआईवी संक्रमित मरीजों को मिलने वाली जांच और इलाज की सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। हमने देखा कि एआरटी इलाज के एचआईवी संक्रमित मरीजों में कई अन्य घातक बीमारियों के लिए जोखिम बढ़ गया। संगठन ने मांग कि है कि एचआईवी संक्रमित मरीजों का एआरटी कार्यक्रम के अंर्तगत ही सीडीफोर काउंट अनिवार्य रूप से जांच किया जाना चाहिए। एआरटी केन्द्र पर एचआईवी संक्रमित मरीजों की टीबी जांच भी होनी चाहिए, इस संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने भी सीडीफोर 200सेकम होने पर सभी एचआईवी संक्रमित मरीजों की टीबी लैम जांच की अनुशंसा विश्व की है। कुछ राज्यों में एचआईवी संक्रमित मरीजों के वायरल लोड जांच के लिए निजी लैबारेटरी से करार किया था, लेकिन कोविड के चलते कई राज्यों में वायरल लोड की जांच नहीं की जा रही है। जिससे मरीजों में अन्य बीमारियों के संक्रमण का खतरा लगातार बना हुआ है। संगठन ने एचआईवी मरीजों के इलाज के लिए मिलने वाले फंड के को भी बढ़ाने की मांग की है, जिसके लिए एएचडी (एप्रोच टू एचआईवी डिसीस) कार्यक्रम को अंर्तराष्ट्रीय एड्स वित्त संस्था यूएस प्रेसिडेंट इमरजेंसी प्लान फॉर एड्स रिलीफ कंट्री ऑपरेशनल प्लान के साथ जोड़ने की बात कही है।


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