देश में पहली बार तैयार हुआ हीट स्टे्रस एक्शन प्लान
Editor : Mini
 10 May 2022 |  63

नई दिल्ली,
धरती का तापमान धीरे धीरे बढ़ रहा है, जिसका असर भीषण गर्मी के रूप में देखा जा सकता है। हाल ही में जारी की गई छठवीं आईपीसीसी ( इंटरगर्वमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज) की रिपोर्ट के अनुसार धरती सतह का तापमान दो डिग्री फारेनहाइट या 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक हो गया है। इसका सीधा तात्पर्य है कि भविष्य में तापमान अधिक बढ़ेगा और लोगों कोेपहले की अपेक्षा अधिक गर्मी का सामना करना पड़ेगा। जैसा कि आईएमडी (INDIA METEOROLOGICAL DEPARTMENT. ) की इस साल की रिपोर्ट में देखा गया कि 122 सालों में मार्च महीने का अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकार्ड किया गया। जबकि 72 सालों में अप्रैल महीने में सबसे अधिक गर्मी देखी गई। रिकार्ड गर्मी के यह आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं बढ़ती गर्मी का असर लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा, इसलिए हीट स्ट्रेस से बचने के लिए भविष्य में किसी ठोस रणनीति की जरूरत होगी।
आईआरडीए (इंडिग्रेटेड रिसर्च एंड एक्शन फॉर डेवलपमेंट) या इराडे ने इस संदर्भ में पहली बार ग्लोबल वार्मिग (Global Warming) पर काम करने वाली अंतराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर हीट स्ट्रेस एक्शन प्लान (Heat Stress Action Plan) जारी किया गया है। शुरूआत में दिल्ली, भुवनेश्वर और राजकोट हीट स्टे्रस इन इंडियन एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमे जेंडर सेंसिटिव हीट स्ट्रेस प्लान को प्रमुखता दी गई है। एक्शन प्लान के अनुसार घरों के अंदर रहने वाली महिलाओं को बाहर काम के लिए जाने वाले लोगों की अपेक्षा हीट स्ट्रेस का खतरा अधिक रहता है। इसलिए हीट स्ट्रेस से बचाव के लिए वार्ड स्तरीय संवेदनशील एक्शन प्लान तैयार किया जाना चाहिए। इराडे के डिप्टी डायरेक्टर रोहित मगोत्रा ने बताया कि हीट प्रबंधन के लिए तीन चरण की तैयारी करने की रणनीति तैयार की है, जिसमें पहले चरण में इंट्रा सिटी टेंम्परेचर वेरिएशन पर काम करने की जरूरत है, जिसमें शहरों की भौगौलिक स्थिति के आधर पर शहरों के अंदर के तापमान का आकलन किया जा सके। इसमें ऐसे क्षेत्रों को प्रमुख रूप से शामिल किया जाएगा जहां गर्मी के दिनों में पानी और बिजली प्रमुख समस्या होते हैं ऐसे झुग्गी वाले इलाकों में बढ़ते तापमान के असर को कई सामाजिक पहलूओं को जोड़कर देखा जाएगा। देशभर में हीट वेव (Heat Wave) का डाटा एकत्रित करने के लिए थर्मल हॉट स्पॉट मैपिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए, क्लाइमेटोलॉजी (climatological )आधारित डाटा के अनुसार शहरी क्षेत्र में हीट वेव की तीव्रता का पता लगाया जा सकेगा। तीसरा सबसे अहम पहलू हीट वेव का लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति के साथ ही रोजमर्रा के जीवन और कार्यक्षमता पर क्या असर पड़ता है इसका भी डाटा एकत्र किया जाना चाहिए। इराडे का कहना है कि भारत में वंचित लोगों के लिए हीट वेव का असर अधिक पड़ता है एक्शन प्लान के तहत इस बात पर जोर दिया गया है कि किसी भी तरह से ऐसे वंचित लोगों के जीवन पर गर्मी का असर नकरात्मक नहीं पड़ना चाहिए। इसके जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर एक्शन प्लान को लागू करने की योजना है। गर्मी से बचाव के लिए मेडिकल सहायता और आपात स्थिति में किस तरह हीट स्ट्रोक के मरीज को सहायता पहुंचाई जाए इसके लिए जागरूकता पोस्टर जारी किए गए हैं।












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