मोटापा कम करने का एम्स शुरू करेगा कोर्स -
Editor : Rishi
 04 Dec 2016 |  621

बढ़ते मोटापे की समस्या को देखते हुए एम अब खुद चिकित्सकों को प्रशिक्षित करेगा। देश में पहली बार संस्थान ने बैरिएट्रिक सर्जरी के लिए फेलोशिप कोर्स की शुरूआत की है। आगामी सत्र से दो साल के इस कोर्स के लिए छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। मोटापे से जुड़ी समस्या के अध्ययन के लिए एम्स शोध में भी सहायता करेगा।
संस्थान के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि बैरिएट्रिक सर्जरी के बेहतर परिणाम देखने के बाद अब इसमें विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया जाएगा। देश में मोटापे की सर्जरी के लिए केवल 583 सर्जन हैं, और हर साल 12 हजार सर्जरी की जाती है, जबकि अमेरिका में हर साल मोटापा कम करने की दो लाख सर्जरी की जाती हैं। एम्स में मोटा कम करने का फेलाशिप कोर्स शुरू होने के बाद अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा सकता है। डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि संस्थान में मौजूद एक रोबोट का इस्तेमाल लगभग हर विभाग की सर्जरी के लिए किया जाता है। 20 प्रतिशत मोटापे क ऐसे मामलों में सर्जरी करने की सलाह दी जाती है, जबकि वजन कम करने के अन्य सारे विकल्प फेल हो जाते हैं।

निजी में 2 लाख एम्स में पांच हजार
बैरिएट्रिक सर्जरी का चलन अब बढ़ गया है, निजी अस्पताल दो से तीन लाख रुपए में बैरिएट्रिक सर्जरी कर मोटापा कम करते हैं। जबकि एम्स में जनरल वार्ड में यह सर्जरी बिना किसी शुल्क के की जाती है। केवल दवाएं और कुछ उपकरणों के लिए महिला को पांच हजार रुपए खर्च करने पड़े। डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग में अब तक प्रोस्टेट और पथरी निकालने के लिए रोबोट का इस्तेमाल होता था।

कैसे होता है रोबोट से मोटापा कम
बैरिएटि्रक सर्जरी के बाद वजन कम होने के साथ ही शुगर को भी नियंत्रित किया जा सकता है। इसी क्रम में डॉक्टरों की टीम ने 55 वर्षीय महिला की देश की दूसरी रोबोटिक विधि से गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी की गई, अब तक लैप्रोस्कोपिक विधि से गैस्ट्रिक बाइपास की जाती थी। रोबोट के जरिए थ्री डायमेंशनल इमेज के जरिए अमाशय के एक हिस्से को पाउच के जरिए बांध दिया गया। थ्री डायमेंशन इमेज होने के कारण पाउस के लीक होने का खतरा कम रहता है। सर्जरी में पेट में दो से तीन इंच के पांच छोटे छेद किए, जॉय स्टिक के जरिए रोबोट को कंट्रोल रूम से मॉनिटर किया गया। टीम में शामिल डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग में बैरिएट्रिक सर्जरी के लिए रोबोट का इस्तेमाल एम्स में पहली बार हुआ है, जबकि इससे पहले दक्षिण भारत के निजी अस्पताल में रोबोटिक गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी की गई थी।

कैसे होता है मोटापा कम
गैस्ट्रिक बायपास- इस विधि में भूख को नियंत्रित कर मोटापे को कम करने का लक्ष्य रखा जाता है। अमाशय के एक हिस्से को मुख्य भाग से अलग कर देते हैं, इसके लिए अमाशय की पैंचिंग की जाती है। इससे अमाशय में पहुंचने वाली खाने की मात्रा अपने आप कम हो जाती है।
स्लीव गैस्टैक्टमी-इसमें सर्जरी कर अमाशय के हिस्से को शरीर से ही निकाल देते हैं। एरिया कम होने के कारण खाना खाने की क्षमता ही कम हो जाती है। इस प्रक्रिया में चार से पांच घंटे का समय लगता है।
बैरिएट्रिक सर्जरी-इस सर्जरी में अमाशय की कई जगह से पैचिंग की जाती है। इसके लिए एक बैंड का इस्तेमाल किया जाता है, जो अमाशय एक बड़े हिस्से को जाकर बंद कर देता है। बैंडिंग के जरिए पेट में पहुंचने वाली 50 प्रतिशत कैलोरी को रोका जा सकता है।

आयुर्वेद और योग में भी संभावनाए
आयुर्वेदाचार्य डॉ. आरपी पराशर ने बताया कि आयुर्वेद की कुछ औषधियों से मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है, जिसमें गरम पानी के साथ शहद का सेवन और गुग्गल को लाभदायक बताया गया है। वहीं योग में कपाल भाति और अनुलोम विलोम को पेट कम करने में सहायक माना जाता है। लेकिन इससे एक निर्धारित मोटापे को ही दूर करने का दावा कर सकते हैं।


Browse By Tags




Related News

Copyright © 2021 Sehat 365. All rights reserved          /         No of Visitors:- 270080