दिल्ली को मिली एक और जीनोम सिक्वेंसिंग लैब
Editor : Mini
 08 Jul 2021 |  394

नई दिल्ली,
दिल्ली के वसंतकुंज स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायलरी साइंसेस में गुरूवार की दिल्ली की पहली जीनोम सिक्वेंसिंग लैब शुरू हो गई। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाली ने लैबारेटरी का उद्घाटन किया। सीएम ने कहा कि कोविड19 जीनोम सिक्वेंसिंग लैब से कोरोना के नये वेरिएंट की तुरंत पहचान हो सकगी, साथ ही इस बात का भी पता लगाया जा सकेगा कि वायरस कितना खतरनाक है। सीएम ने दिल्ली की दूसरी जीनोम सिक्वेंसिंग लैब का उद्घाटन किया, इससे पहले इसी तरह की लैब का लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में बुधवार को उद्घाटन किया। एलएनजेपी और आईएलबीएस की लैबारेटरी में एक दिन में पांच से सात सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की जा सकेगी।
होल जीनोम सिक्वेंसिंग लैबारेटरी में एसएआरसीओवीटू या कोविड19 वायरस के दिल्ली एनसीआर के कोविड सैंपल की टेंस्टिग कर वायरस में बदलाव या म्यूटेंट को तुरंत पहचाना जा सकेगा। आईएलबीएस की इस स्टेट ऑफ आर्ट लैबारेटरी में होल जीनोम सिक्वेंसिंग की जा सकेगी, जिसकी सहायता से कोविड वायरस के तीस हजार मॉलीक्यूल के म्यूटेशन को पहचाना जा सकेगा। लैबोरेटी का उद्घाटन करते हुए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरी वाल ने कहा कि आईएलबीएस में स्थापित की गई नई लैबारेटरी के जरिए कोविड19 वायरस का सर्विलांस अधिक बेहतर तरीके से किया जा सकेगा, इसके साथ ही इसपर भी नजर रखी जा सकेगी कि भविष्य में वायरस में किस प्रकार का बदलाव या म्यूटेशन होगा और यह कितना खतरनाक हो सकता है। सीएम ने कहा कि मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल और आईएलबीएस ने इतनी बेहतर प्रशिक्षित पैरामेडिकल टीम को नियुक्त किया है जो वायरस के बदलाव को समय रहते पहचान लेगें और इससे बचाव के लिए अधिक बेहतर प्रयास किए जा सकेगें। लैबारेटरी में केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि आसपास के राज्यों के सैंपल की भी जीनोम सिक्वेंसिंग की जा सकेगी। कार्यक्रम में उपस्थित आईएलबीएस के प्रमुख डॉ. एसके सरीन ने बताया कि अत्याधुनिक जीनोम सिक्वेंसिंग लैबोरटरी में वायरस में बदलाव की पहचान के लिए सभी उपकरणों का प्रबंध किया गया है साथ ही इसे ऑपरेट करने वाले पैरामेडिकल स्टॉफ भी हमारे पास हैं अभी यहां अन्य वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग का पहले से ही काम किया जा रहा है, इसलिए लैबारेटरी में कोविड19 के वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग तुरंत शुरू की जा सकती है। आईएलबीएस कोविड प्रोटोकाल के संगठन इंसाकॉग का भी सदस्य है, इसलिए लैबोरटरी के संचालन में कोविड प्रोटोकल के सभी मानकों का पालन किया जाएगा।

कैसे होगी लैबारेटरी में नये बदलाव की पहचान
कोविड19 वायरस में कब कौन सा बदलाव या म्यूटेशन हो रहा है, इस बात का पता लगाने के लिए दिल्ली एनसीआर से उठाए गए कोविड के आरटीपीसीआर सैंपल को लैबारेटरी में लाया जाएगा। इसके बाद लैबारेटरी में सभी सैंपल की जांच के बाद उसकी रिपोर्ट आईडीएसपी को भेज दी जाएगी। यह काम नियमित रूप से किया जाएगा, किसी एक भी सैंपल को सिक्सेंविंग की जांच बिना वापस नहीं भेजा जाएगा। अहम यह है कि लैबोरेटरी की आधुनिक मशीन (नेस्ट सिक और एमआई सिक) की सहायता से केवल स्पाइक प्रोटीन में बदलाव की पहचान नहीं हो सकेगी, बल्कि यह होल वायरस यानि वायरस के किसी भी क्षेत्र में बदलाव या म्यूटेशन को पहचान कर सकेगी। यह मशीन हर हफ्ते 400 तरह के म्यूटेशन को पकड़ने में सक्षम होगी। दिल्ली सरकार ने आईएलबीएस के लिए एक अन्य नई मशीन नोवावैक को भी स्वीकृत किया है जो वायरस के म्यूटेशन के हफ्ते तीन हजार प्रकार की पहचान कर सकती है।




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